Friday, March 20, 2020

कुछ तो बात है

कुछ तो बात है इन फूलों में...
 जो खिल जाती है मुस्कराहट
 जब भी देखती हूँ
 इन्हें खिलते हुए
 महक जाती हूँ मैं
 इनकी सुगंध से
 जब प्रेम से महकाते हैं
 यादों का आँगन
 बस और क्या कहूँ..
 रिमझिम फुहार में
 भीग जाता है मन ~ पायल   

कुछ देर मेरे पास रहो

कुछ देर मेरे पास रहो
कुछ मेरी सुनो
 कुछ अपनी कहो
 मुस्कुराओ गुमसुम ना रहो
 ये दिल की बातें हैं
धड़कनो से सुनो
चंद एहसास प्यार के
मीठे ख्वाबों से बुनो ~पायल 

Tuesday, October 22, 2019

कुछ लम्हे

जि़न्दगी की रील में
कुछ लम्हे
खूबसूरत, नादान, मासूम,
ठहर जाते हैं
भूली बिसरी यादें बनकर,
सिमट जाते हैं

ये लम्हे
कभी मुस्कुराते हैं
कभी खिलखिलाते हैं
कभी आँसू  बन
छलक जाते हैं
खूबसूरत एहसास जि़न्दगी के
जि़न्दगी जीना सिखाते हैं
जि़न्दगी की रील में
जब पलटकर देखते हैं
ये लम्हे एक दूजे से जुडे़ नज़र आ़ते है़ं
जीने का सलीका  सिखाते हैं
जि़न्दगी की रील में
कुछ लम्हे यूँ ही गुज़र जाते हैं
-पायल

Thursday, February 28, 2019

ये शहर

ये जागते हुए शहर, ये जगाते हुए शहर।
दूर से कुछ खास नज़र आते ये शहर।

इस भीड़ में कहीं खो से जाते।
शोरगुल में खुद से दूर जाते ये शहर।

ऊब जाते वीराने में डूबकर।
सुकून की नींद तलाशते ये शहर।


यादों की बस्तियों में घरोंदे बसाते।
जागते शामो-सहर, किस्से सुनाते ये शहर।

कुछ उजाड़ से अस्तित्व की तलाश में।
हम सबके बीच बँटते जाते ये शहर।


बेमिसाल गहराई है कुछ ख्यालों में।
खुद की आवाज़ ना सुन पाते ये शहर।


किस शहर से चले आते हो?
किस शहर में बसना चाहते हो?
वोजो सरहदें बनाता है
या वो जो सरहदें मिटाता है?
एक शहर भीतर जलता है।
एक शहर दिलों में पलता है।
-पायल

Saturday, June 23, 2018

बेचैन , बरसाती लहर में ,
गुमसुम सी मुस्कराहट 
करवट बदलती 
बिस्तर पर पड़ी थी 
प्यार से सींचा 
तो नयी पत्ती सी कोमल 
ताज़गी बन चहक उठी 
घर भर में फिर से 
मुस्कुराने लगा जीवन 
फिर से महक उठा कण कण 
- पायल
23.6.2018

 

Thursday, May 10, 2018

एक तूफ़ानी रात

बदला हुआ मिज़ाज था मौसम का
सुबह तक बरसा था पानी
गिरे हुए पेड़, और बिछे हुए पत्ते,
गवाह हैं, उस तूफ़ान के,
जो आया और गुज़र गया।

चमकती धूप को देख,
कौन कह सकता है,
कल रात तूफ़ान आया था
कौंधती बिजली, और  तीखी तेज़ बारिश
साथ लाया था।

किसी का मकान कच्चा है
किसी  की बेटी की शादी
और  भी न जाने क्या क्या
कितने ख़्याल आये थे उस पल
कितनी चिंताऐ घेरने लगी थी यूँ ही।

दो पल की ये चिंताऐ
और दो पल का तूफ़ान...

सब गुज़र  जाता है
वक्त बदल जाता है
और कुछ आदतें भी!
-पायल 

Sunday, July 16, 2017

ये पल..

सावन का पहला सोमवार
मिट्टी की सौंधी खुशबू
और बारिश में भीगता मन
एक छतरी
फूलों के रंग
भीगते हम
आधी मैं और
आधे तुम
-पायल
10.7.17

मेरी कलम से..

चलो, आज फिर दिल टटोलते हैं
बेधड़क कुछ राज़ खोलते हैं

एक गहरी साँस में न जाने
कितने मचलते गुमसुम लम्हे
 मुट्ठी में दबे चंद अल्फ़ाज़
मेरी कलम की स्याही से बोलते हैं
चलो, आज बंद मुट्ठी खोलते हैं

क्या छूट गया,  क्या साथ लाये,
क्यों सोचना? क्या अगला,
क्या पिछला, बस आज है,
आज ही चलो बोलते हैं
चलो, आज में रंग घोलते हैं

चलो, आज फिर दिल टटोलते हैं
बेधड़क कुछ राज़ खोलते हैं
-पायल
10.7.17